Monday, June 12, 2017

आदतें

मैं लंच तयार करती रही ,
तुम भरा डब्बा वापिस लाते रहे ...
तुम्हारे इरादे से नावकिफ रही ,
तुम इलज़ाम लगाते रहे

राशन ,सब्जी ,फल ,बच्चा ,नौकरी ..
सब इन्तेज़ाम हमारा रहा,
सफ़ेद पन्नो पर ,काले अंको से ,
सब इलज़ाम तुम्हारा रहा ..

तुम आदतन नाकार करते रहे ..
मै आदतन स्वीकार करती रही ..
तूलिका .

Sunday, June 4, 2017

तुम्हे

कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,
झूठ या सच
की फेहरिस्त में ,
लबलबाना तुम्हे .
जो लाज़मी है ,
उसे भुलाकर तुम्हे ,
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

काश मैंने भी सुना होता ,
छठी इन्द्रियों की आवाज़
जो सच थी और है
जो मुझे अनजाने तारीफ सी लगी ,
उसे फटकार कर तुम्हे ,
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

बंधन की आज़ादी
न भाई तुम्हे ,
पति पिता की उपाधि से ज़्यादा
पुरुषत्व के यश को
चाहा तुमने
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

कसमसाई सी मेरी आंखे
काश सुख जाती ,
कहकहों के आदि मेरे कान
काश बधिर हो जाते ,
माँ का दिल
काश पत्थर हो जाता ,
लबलबी मांगों को
काश सौंप पाती तुम्हे ,
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

उस सपनो को जीने की
कोशिश की मैंने ,
जिसके लिए
न तैयार कर पाई तुम्हे
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

इनको ,उनको ,उसको ,
माँ ,पिता ,भाई ,सबको
अरमानो की छत पर बिठाकर
मुझे ,दफनाया है तुमने
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

सुरमई एक छोटी सी ज़िन्दगी में
ख्वाबों का नूर लेकर आई थी मै ,
हसरतो के झूलों को
सावन में देखा था मैंने ,
हाँ सच है कभी झूला नहीं  ,
कभी तुम्हे ठेला नहीं मैंने
गर्मजोशी के अहसास को दबाकर
कभी रोका नहीं तुम्हे
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

इल्ज़ामात की फेहरिश्त में ,
ज़ोर आजमाइश की है तुमने
जानकर अनजान बन,
सरेआम नीलामी की है तुमने ,
जो रिश्ता सात फेरों में बाधा गया
उसकी खूंठ छोड़कर
कहकशों को थामा है तुमने
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

अपने सेहरे को सड़क पर फ़ेंक कर
कितना सुकून है तुम्हे
किसी के लहू के अंश पर बैठकर
रोज़ इनको उनको सबको
अच्छा  है फुसफुसाना तुम्हे
एप पर मदमस्त ,व्यस्त
वो ब्लेस्ड मानते है तुम्हे
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,

मेरी कोशिश थी और रहेगी ,
माँ ही सही थोड़ा और बहेगी
आँखों की नमी अब थमेगी
पांच वर्षो में जो पिघला है
वो बर्फ फिर बनेगी
बढ़ेगी ,चढ़ेगी ,चलेगी
मर्यादित  ज़िन्दगी सौंप कर तुम्हे ,
कितना अच्छा लगता है ,
तारीफें करना तुम्हे ,
तूलिका

Friday, June 2, 2017

अरमान

तुम आई तो आई थी मै,
नए रूप में ,
नए धुप में ,
नए छांव में ,
नए ठाँव में ,,
नए गांव में ,
नए नाव में ,
तुम आई तो आई थी मै,

तुम आई तो आई थी मै,
रास्ते नए
मंज़िल नई ,
सफर नया
राही नए
अरमान नए थे ,
सपने नए ,
तुम आई तो आई थी मै,

तुम आई तो आई थी मै,
जानती थी मै ,
कांटे नए है ,
कई उग चले है
झूठे अहसान ,
कई दब चले है ,
कई भिखारी,
नयी मांग ले खड़े है ,
तुम आई तो आई थी मै,

तुम आई तो आई थी मै,
कहा था तुमने .
तुम पतवार बदलोगी ,
नाव मोड़ोगी ,
अक्षर से ,
सम्मान ओढ़ोगी,
सामंजस्य की ओट में ,
इंसान ढूँढोगी ,
तुम आई तो आई थी मै,

तुम आई तो आई थी मै,
जानती थी मै भी ,
वक़्त बदलेगा
तुम भी बदलोगी ,
अरमान सवरेंगे,
वो कहा ठहरेंगे ?
उड़ जाओगी
मुस्कुराओगी .
आँखों की नमी
यही छोड़ जाओगी
तुम आई तो आई थी मै !

तूलिका

Saturday, April 25, 2015

हथियार

शिशु जब रोता है ,
माँ को ,
पिता को ,
दादी को ,
नानी को
पड़ोसी को,
दूधवाले को ,
सब्जीवाले को ,
धोबी को ,
आया को ,
सबकी माया को ,
लगता है उसे कोई बात है ,
शायद भूख है ,
प्यास है ,
या कोई आस है.....
लेकिन कुछ नए ,
 समृद्ध ,प्रभुद्ध जीवियों का मानना है
रोना एक हथियार है
आंसू एक औजार है ,
जो चलता है
बरसता है
दौड़ता है ,भागता है ,
नानी कहती है ,
रोष निकालता  है
 दर्द सेहराता है
ये मरहम है ,पिघलता है ,
लेकिन कुछ नए ,
 समृद्ध ,प्रभुद्ध जीवियों का मानना है
रोना एक हथियार है
दूसरे के हों तो  वार है
अपने होतो अंधियार है। .
शायद सही है
रोते  देखना स्वीकार है
रुलाना अधिकार है ,
रोना तो हथियार है

तूलिका !

Thursday, March 26, 2015

मुबारक !


दोस्त मुबारक ,
जगह मुबारक ,
आन मुबारक ,
मान मुबारक ,
तुम्हे  मुबारक तुम्हारी शान मुबारक!

सुबह मुबारक ,
 शाम मुबारक ,
विहान मुबारक,
रात मुबारक ,
पल पल का वो रोब मुबारक !

चेहरों की वो भीड़ मुबारक ,
हंसी की वो टीस मुबारक ,
 संदेशों का ऍप   मुबारक ,
तकनिकी में वास मुबारक!


 खास मुबारक ,
पास मुबारक ,
अख़बारों का पेज  मुबारक ,
फ़रेबियों  का हाथ  मुबारक !

अपहरण मुबारक ,
सरफ़रोश मुबारक ,
अब तक छप्पन ,ट्रॉय मुबारक !

सर्द मुबारक ,
गर्द मुबारक ,
सख्त मुबारक,
नर्म  मुबारक ,
हरा मुबारक ,
लाल मुबारक,
तुम्हे तुम्हारा साथ मुबारक  !