Thursday, May 30, 2019

तज़ुर्बा

बीज में साँस ,
रंगनुमा अहसास हो तुम .
भरी दोपहर में ,
आम के बयार हो तुम .
संघर्ष के काँटों में ,
गुलाबी गुलाब हो तुम .
चेहरों की दुनिया में ,
सख्त पहचान हो तुम .
बसंत के मौसम में ,
भावनाओं का बुलबुला हो तुम .
जो ठहर जाये तो रिश्ता ,
वरना फासला हो तुम .
चल दिए साथ तो ,
चमकता सितारा हो तुम .
वो कह रहे है किस्मत ,
पर सिखाने को मेहरबान हो तुम .
फलसफा हो तुम ,
तज़ुर्बा हो तुम,
हल्की सी कसक लिए ,
तर्जुबा हो तुम .
जिंदगी हो तुम .

तूलिका .

बेरंग दुनिया


हाथों में हाथ है ,
लेकिन नब्ज़ छूटी सी है ,
सीने से लगे डीपी में ,
अहसास की दूरी सी है .
होठों पर मुस्कराहट है ,
ख़ुशी की कमी सी है .
सपनो के समंदर में ,
आँखों में नमी सी है .
यादों के बवंडर में ,
रात अमावस सी है .
टेक केयर के जमघट में ,
अविश्वास की ज़मी सी है .
तुम ना हो तो,दुनिया बेरंग सी कहीं ,
और होतो मन में रौशनी सी है .

तूलिका .

Saturday, December 15, 2018

रिश्ते

कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते
कुछ रिश्ते नाम के होते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

सूरज तो रोज़ निकलता है
कुछ फूल खिलते है
कुछ धूप ढोते है
दूर की रौशनी से भी
कुछ ख्वाब पलते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

खास होती है शामे
जब दोस्त मिलते है
अपनों के अहसास तले
पतझड़ भी बसंत लगते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

खुशनसीब है वो जो
न मिलकर भी रोज़ मिलते है
वर्ना साथ बैठकर भी लोग
टेक्स्ट करते है .
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

कमतर नहीं है वो
जो असंयम में संयम रखते है
नाविक बहुत है समूहों में
कम है वो जो तूफ़ान रोकते है
दीखते है कई उड़ते हुए चारो ओर
चंद है जो अपने पर लिए उड़ते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

तूलिका

Monday, June 18, 2018

ख़ुशी

ख़ुशी

ख़ुशी अपनों में है
ख़ुशी अपनों से है
ख़ुशी अपना बनाने में है
ख़ुशी उनमे ' मैं ' में है
ख़ुशी छूटती ट्रैन पकड़ने में है
ख़ुशी  9am के पंच में है
ख़ुशी लोकल में सीट मिलने में है
ख़ुशी तत्काल टिकट कन्फर्मेशन में है .

ख़ुशी दादाजी के माथे की लकीरों को गिन्नमे है
ख़ुशी माँ के अंचल में हाँथ पोछने में है
ख़ुशी उसकी लहराती जुल्फों की खुशबू में है
ख़ुशी आम के टिकोरों की चोरी में है
ख़ुशी फाइनल एक्सपोर्ट में है
ख़ुशी मंटो में है
ख़ुशी गोदान में है .

ख़ुशी करैक्टर है
ख़ुशी बिना चार्जर के पूरा दिन फ़ोन इस्तेमाल करने में है
ख़ुशी थ्री परसेंट रिमेनिंग में
विडिओ अपलोड पर है
ख़ुशी व्हाट्सअप की डबल टिक में है
ख़ुशी फ्री डाटा में है
ख़ुशी मैसेंजर की टोन में है
ख़ुशी उसकी लाइक में है
ख़ुशी मामू में है
ख़ुशी सरोकार में है
ख़ुशी विपक्षी सरकार की हार में है .

ख़ुशी लास्ट विकेट के चौके में है
ख़ुशी स्टेशन के कुल्हड़ की चाय में है
ख़ुशी साइन आउट में है
ख़ुशी लोग ऑन में है
ख़ुशी नोटिफिकेशन में है
ख़ुशी पासपोर्ट की वेरिफिकेशन में है .

ख़ुशी समंदर है
ख़ुशी अपने अंदर है
ख़ुशी कलैंडर है

तूलिका .

Thursday, November 16, 2017

संवेदनाएं

संवेदनाएं 

माँ कहती है तुम छुटपन से बहुत संवेदनशील थी ,
किसी  को रोता   देख रोने लगती थी  ,
फैमिली फिल्म देखकर ज़रूर रोती थी,
गुलशन ग्रोवर ,अम्ब्रीश पूरी प्रेम चोपड़ा जी से  मैंने नफरत ग्रेजुएशन में ख़तम की ,
कॉलेज डेज़  में  मेरे कैंटीन खाते  पर बहुतों ने लंच किया है ,
आर्ट एंड क्राफ्ट क्लास में ,  मेरा सामान सार्वजनिक होता था .
छुट्टियों में मित्र हमेशा मिस कॉल दिया करते थे ,
और मेरे काल करने पर 20 मिनट से कम  बात नहीं होती थी ,
हॉस्टल में मेरा कमरा अड्डा (विषय चर्चा) हुआ करता था ,
जहाँ चाय और मैगी कभी भी उपलब्ध होती थी ,
गला ख़राब होने पर मेरा अपना फ्लास्क किसी और की टेबल पर मुस्कुराता था ,
मास्टर्स डेज़  में मेरी 1GB की पेन ड्राइव किसी के भी हाँथ में मिल जाती थी ,
आज भी मेरी बहुत किताबें ,फिल्म dvds किसी की शेल्फ पर अपनी आइडेंटिटी सजो रही होंगी ,
इन संवेदनाओ के साथ अहम् रिश्ते मैंने बनाये है ,रिश्ते बन रहे है ,
आज भी मुझे इंजेक्शन और डेटोल देखकर आंसू आता है, 
लेकिन इन संवेदनाओ के बीच अच्छा लगता है जब 9 .3 0 pm पर आपकी कॉल बेल बजती हो  ,
और बहुत ही खास माननेवाले  बेटाडीन लिए खड़े हो (टेक्स्ट से मालूम था की ऊँगली में  चोट आ गई है )
आपको यकीन होता है की आपकी माँ सही कहती हैं  ,
आपके रिश्तों में संवेदनाएं है और रहेंगी। 

तूलिका