Wednesday, July 17, 2019

बीज

जो पास बैठा है वो कोई पोशाक सा है ,
मानो नीम में जैसे बेल आगोश सा है ,
उलझनों की टीस में जिधर भी देखो ,
सावन में भी मानो बादल खामोश सा है ।

सूखती नदिया नहीं,
मन भी सूख गए है ,
जो चमकता दीखता है डीपी में
वो रोता कंकाल सा है ।

मैं,
तुम,  वो,  ये,  उनकी ,इनकी, में ,
चाय का प्याला ,
जंजाल सा है ।

दीवारों पर लाइक्स का सैलाब तो है ,
पर खुशियों का मेला वीरान सा है ।
बदलती नहीं वो तंजभरी आँखे ,
जो ज्ञान के जमघट में अनजान सा है ।

कोशिश है ,थी ,
की रहेगी हमारी ,
जो मैंने बीज बोये है
वो कल को पैगाम सा है ।
तूलिका ।

Tuesday, June 11, 2019

पुरानी चादर

पुरानी  चादर

माथे पर आई लकीरें ,
अब पार्क में दीखती हैं।
ठहाके लगाते चेहरे ,
अब सुबह टहलते हैं ।
कुछ सुकून भरी उँगलियाँ ,
108 दानो को गीन रही हैं ।
जोड़ों के दर्द को ढकते हुए ,
कुछ जोड़े गुरूद्वारे में रोटियां बेल रही हैं ।
कुछ जोड़ी हाँथ ,
नन्हे हांथों के साथ बसस्टैंड पर खड़े हैं ।
कुछ मायूस निगाहे ,
डाकबाबू का इन्तिज़ार कर रही हैं ।
कुछ काँपती आवाज़ें ,
टचस्कीन को टच कर रही हैं।
कुछ आशाएं झुर्रियों के साथ ,
बेंच पर बैठी हैं ।
कुछ उम्मीदें,
उन सूत के धागों को गीन रही हैं ,
जो दशकों से ,
अनगिनत चौकियों पर बिछी हैं ।

तूलिका ।


Thursday, May 30, 2019

तज़ुर्बा

बीज में साँस ,
रंगनुमा अहसास हो तुम .
भरी दोपहर में ,
आम के बयार हो तुम .
संघर्ष के काँटों में ,
गुलाबी गुलाब हो तुम .
चेहरों की दुनिया में ,
सख्त पहचान हो तुम .
बसंत के मौसम में ,
भावनाओं का बुलबुला हो तुम .
जो ठहर जाये तो रिश्ता ,
वरना फासला हो तुम .
चल दिए साथ तो ,
चमकता सितारा हो तुम .
वो कह रहे है किस्मत ,
पर सिखाने को मेहरबान हो तुम .
फलसफा हो तुम ,
तज़ुर्बा हो तुम,
हल्की सी कसक लिए ,
तर्जुबा हो तुम .
जिंदगी हो तुम .

तूलिका .

बेरंग दुनिया


हाथों में हाथ है ,
लेकिन नब्ज़ छूटी सी है ,
सीने से लगे डीपी में ,
अहसास की दूरी सी है .
होठों पर मुस्कराहट है ,
ख़ुशी की कमी सी है .
सपनो के समंदर में ,
आँखों में नमी सी है .
यादों के बवंडर में ,
रात अमावस सी है .
टेक केयर के जमघट में ,
अविश्वास की ज़मी सी है .
तुम ना हो तो,दुनिया बेरंग सी कहीं ,
और होतो मन में रौशनी सी है .

तूलिका .

Saturday, December 15, 2018

रिश्ते

कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते
कुछ रिश्ते नाम के होते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

सूरज तो रोज़ निकलता है
कुछ फूल खिलते है
कुछ धूप ढोते है
दूर की रौशनी से भी
कुछ ख्वाब पलते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

खास होती है शामे
जब दोस्त मिलते है
अपनों के अहसास तले
पतझड़ भी बसंत लगते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

खुशनसीब है वो जो
न मिलकर भी रोज़ मिलते है
वर्ना साथ बैठकर भी लोग
टेक्स्ट करते है .
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

कमतर नहीं है वो
जो असंयम में संयम रखते है
नाविक बहुत है समूहों में
कम है वो जो तूफ़ान रोकते है
दीखते है कई उड़ते हुए चारो ओर
चंद है जो अपने पर लिए उड़ते है
कुछ ज़िन्दगी के किस्से होते है
कुछ ज़िन्दगी के हिस्से होते है

तूलिका